
Kabira Mana Nirmal Bhaya
कबीरा मन निर्मल भया
Vishnu Bhajan
A profound bhajan based on the dohas (couplets) of Saint Kabir, expressing the purification of the mind through devotion to God. Kabir's teachings emphasize inner transformation over external rituals.
ॐ
कबीरा मन निर्मल भया, जैसे गंगा नीर,
पीछे पीछे हरि फिरें, कहत कबीर कबीर।
कबीरा मन निर्मल भया, जैसे गंगा नीर,
पीछे पीछे हरि फिरें, कहत कबीर कबीर।
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,
जो मन खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।
कबीरा मन निर्मल भया।
पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ, पण्डित भया न कोय,
ढाई अक्षर प्रेम का, पढ़े सो पण्डित होय।
कबीरा मन निर्मल भया।
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।
कबीरा मन निर्मल भया।
साईं इतना दीजिये, जा में कुटुम समाय,
मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाय।
कबीरा मन निर्मल भया।
दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय,
जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय।
कबीरा मन निर्मल भया।
कबीर कहे सुनो भाई साधो,
हरि का नाम ही सार है।
जग में आये जग से जाना,
सब माया का व्यापार है।
कबीरा मन निर्मल भया, जैसे गंगा नीर,
पीछे पीछे हरि फिरें, कहत कबीर कबीर।
ॐ