Bhajans/Vaishnav Jan To Tene Kahiye
Vishnu

Vaishnav Jan To Tene Kahiye

वैष्णव जन तो तेने कहिये

Vishnu Bhajan

A devotional bhajan by the 15th-century poet Narsinh Mehta, popularized by Mahatma Gandhi. It defines the qualities of a true devotee.

वैष्णव जन तो तेने कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे, पर दुःखे उपकार करे तो ये मन अभिमान न आणे रे। सकल लोक में सहुने वंदे, निंदा न करे केनी रे, वाच काछ मन निश्चल राखे, धन धन जननी तेनी रे। समदृष्टि ने तृष्णा त्यागी, परस्त्री जेने मात रे। जिह्वा थकी असत्य न बोले, परधन नव झाले हाथ रे। मोह माया व्यापे नहिं जेने, दृढ़ वैराग्य जेना मनमां रे, राम नाम शुं ताली लागी, सकल तीरथ तेना तनमां रे। वणलोभी ने कपटरहित छे, काम क्रोध निवार्या रे, भणे नरसैय्यो तेनुं दरशन करतां, कुल एकोतेर तार्या रे।