
Bhaj Govindam Bhajan
भज गोविन्दम्
Vishnu Bhajan
A simplified bhajan version of the profound composition by Adi Shankaracharya, urging seekers to worship Govinda (Vishnu) and realize the transient nature of worldly attachments.
ॐ
भज गोविन्दम् भज गोविन्दम्,
गोविन्दम् भज मूढ़मते।
सम्प्राप्ते सन्निहिते काले,
नहि नहि रक्षति डुकृञ् करणे॥
मूढ़ जहीहि धनागमतृष्णाम्,
कुरु सद्बुद्धिम् मनसि वितृष्णाम्।
यल्लभसे निजकर्मोपात्तम्,
वित्तम् तेन विनोदय चित्तम्॥
भज गोविन्दम् भज गोविन्दम्,
गोविन्दम् भज मूढ़मते।
नलिनीदलगतजलमतितरलम्,
तद्वज्जीवितमतिशयचपलम्।
विद्धि व्याध्यभिमानग्रस्तम्,
लोकम् शोकहतम् च समस्तम्॥
भज गोविन्दम् भज गोविन्दम्,
गोविन्दम् भज मूढ़मते।
यावद्वित्तोपार्जनसक्तः
स्तावन्निजपरिवारो रक्तः।
पश्चाज्जीवति जर्जरदेहे,
वार्ताम् कोऽपि न पृच्छति गेहे॥
भज गोविन्दम् भज गोविन्दम्,
गोविन्दम् भज मूढ़मते।
सम्प्राप्ते सन्निहिते काले,
नहि नहि रक्षति डुकृञ् करणे॥
ॐ