
Aarti Dwarkadish
द्वारकाधीश की आरती
Aarti of Lord Dwarkadish, Krishna as the king of Dwarka. The aarti recounts his divine incarnation, childhood pastimes in Gokul, lifting of Govardhan mountain, protection of Draupadi, liberation of Gajendra, and his reign in Dwarka with Queen Rukmini.
जय द्वारकाधीश जय द्वारकाधीश।
हरे कष्ट सारे जय द्वारकाधीश।
कंस वध कारण लिया अवतार।
बन्दी घर में प्रकटे हरि मुरलीधर।
देवकी नन्दन जय यदुपति ईश।
जय द्वारकाधीश जय द्वारकाधीश।
गोकुल में बाल लीला खेल दिखाई।
माखन चोरी कर ग्वालन मन भाई।
पूतना तारी कालिय नाग मर्दन कीश।
जय द्वारकाधीश जय द्वारकाधीश।
गोवर्धन गिरि उठाय इन्द्र गर्व हर्यो।
गोपिन संग रास रचाय ब्रज आनन्द कर्यो।
कुब्जा उद्धार कियो दीन के ईश।
जय द्वारकाधीश जय द्वारकाधीश।
द्रोपदी का चीर बढ़ायो लाज बचाई।
गज ग्राह से छुड़ाय कृपा दिखलाई।
अजामिल उद्धार कियो भक्तन के ईश।
जय द्वारकाधीश जय द्वारकाधीश।
द्वारका में राज विराजे रुक्मिणी के संग।
सुदामा को दीन्हें ऐश्वर्य अभंग।
पाण्डव रक्षक सखा जगदीश।
जय द्वारकाधीश जय द्वारकाधीश।
श्री कृष्ण द्वारकाधीश की आरती जो कोई गावे।
भक्ति मुक्ति परमानन्द सहज ही पावे।
जय द्वारकाधीश जय द्वारकाधीश।
ॐ
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🙏 || जय कृष्ण ||

Krishna
कृष्ण • The Supreme Personality of Godhead
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