Bhajans/Mere To Giridhar Gopal
Krishna

Mere To Giridhar Gopal

मेरे तो गिरधर गोपाल

Krishna Bhajan

A celebrated bhajan by the 16th-century poet-saint Meerabai, expressing her unwavering devotion to Lord Krishna as her sole refuge and beloved.

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई, जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई॥ तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई, छाँड़ दई कुल की कानि कहा करिहै कोई॥ संतन ढिग बैठि बैठि लोक लाज खोई, चुनड़ी के किये टूक ओढ़ लीन्ही लोई॥ मोती मूँगे उतार बनमाला पोई, अंसुवन जल सींचि-सींचि प्रेम बेलि बोई॥ अब तो बेल फैल गई आणंद फल होई, दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से बिलोई॥ माखन जब काढ़ लियो छाछ पिये कोई, भगत देखि राजी हुई जगत देखि रोई॥ दासी मीरा लाल गिरधर तारो अब मोही, मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई॥