
Main Nahin Makhan Khayo
मैं नहीं माखन खायो
Krishna Bhajan
A beloved bhajan by the 16th-century blind poet Surdas, depicting child Krishna's innocent denial of stealing butter, a favorite scene from Krishna's childhood pastimes in Vrindavan.
ॐ
मैया मैं नहीं माखन खायो।
ख्याल परे ये सखा सबै मिलि,
मेरे मुख लपटायो॥
देखत ही औरन के आगे,
दई माखन में भायो।
जाने कैसे परनाले ऊपर,
चढ़ि गयो माखन खायो॥
मैया मैं नहीं माखन खायो।
ग्वालन के बालक सब मिलि,
मेरे घर आवत धायो।
मोसों कहत मोल का माखन,
साँझ काहे को आयो॥
मैया मैं नहीं माखन खायो।
गोरज बदन पसीने आयो,
तातो माखन खायो।
सूरदास तब बिहँसि जसोदा,
लै उर कंठ लगायो॥
मैया मैं नहीं माखन खायो।
ख्याल परे ये सखा सबै मिलि,
मेरे मुख लपटायो॥
ॐ