
Akhiyan Hari Darshan Ki Pyasi
अखियां हरि दर्शन की प्यासी
Krishna Bhajan
A deeply moving bhajan attributed to the great poet-saint Surdas, expressing the intense longing of the eyes to behold Lord Krishna. It captures the pain of separation and the devotee's thirst for divine vision.
ॐ
अखियां हरि दर्शन की प्यासी,
अखियां हरि दर्शन की प्यासी।
देख्यो चाहें दया के सागर,
तुम बिन और न कोई।
अंग अंग से प्रीत लगी है,
नैनन नीर बहे दिन रात।
अखियां हरि दर्शन की प्यासी।
कब से खड़ी द्वार पे तेरे,
कब लागे तुझसे नैना।
एक बार दरसन दे दीजो,
सूरदास के नैना।
अखियां हरि दर्शन की प्यासी।
सूरदास प्रभु तुम्हरे दरसन,
बिन जीवन व्यर्थ है मेरा।
जैसे चकोर चन्दा को ताके,
वैसे ताकें नैना तेरा।
अखियां हरि दर्शन की प्यासी।
बिना दरस दुखी यह मन है,
प्रभु मेरी सुन लो अरज़ी।
सूर श्याम तुम्हरे दरसन बिन,
एक पल भी कठिन है जीना।
अखियां हरि दर्शन की प्यासी,
अखियां हरि दर्शन की प्यासी।
ॐ