
Vindhyeshwari Chalisa
विंध्येश्वरी चालीसा
The Vindhyeshwari Chalisa is a devotional hymn of 40 verses dedicated to Goddess Vindhyavasini (Vindhyeshwari), the presiding deity of the Vindhya mountain range. She is a form of Goddess Durga. Reciting this chalisa is believed to remove obstacles, destroy evil, and bring prosperity and protection.
ॐ
॥ दोहा ॥
जय विंध्येश्वरी माता देवी विंध्याचल निवासिनी
दुर्गा रूपिणी माँ जगत की पालिनी तारिणी
विंध्यवासिनी देवी माँ प्रणमूँ बारम्बार
चालीसा तव गाऊँ माता करो कृपा अपार
॥ चौपाई ॥
जय विंध्येश्वरी माता देवी
जय विंध्याचल वासिनी सेवी
विंध्य पर्वत पर तुम विराजो
भक्तन को दर्शन से ताजो
मिर्जापुर में है धाम तुम्हारा
त्रिकोण परिक्षेत्र विख्यात हमारा
विंध्यवासिनी अष्टभुजा माता
काली और ललिता की दाता
त्रिकोण में तीन देवी विराजे
विंध्यवासिनी महाकाली साजे
ललिता देवी तीसरी धामा
तीनों मिल पूरे सब कामा
गंगा किनारे धाम तुम्हारा
पवित्र भूमि का है नजारा
नवरात्रि में मेला लगे भारी
भक्त आवें दूर दूर से सारी
चैत्र नवरात्रि में पूजा होवे
शारदीय नवरात्रि भी शोभे
माँ दुर्गा रूपिणी तुम प्यारी
शक्तिपीठ में तुम अधिकारी
महिषासुर का किया संहार
दुर्गम दैत्यन का किया विदार
शुम्भ निशुम्भ को मारा तुमने
रक्तबीज का नाश किया तुमने
चामुंडा रूप धरो जब माता
दुष्ट दानवन का करो घाता
सिंह वाहिनी माता प्यारी
अष्ट भुजा में शस्त्र बिहारी
त्रिशूल खड्ग गदा धनु धारी
चक्र शंख कमल कर धारी
लाल वस्त्र अति शोभा पावे
मुकुट मणि ललाट सुहावे
भक्तन की सदा रक्षा करो
विपदा बाधा सब दूर करो
ग्राम नगर की रक्षा करो
चोर डकैत का भय दूर करो
प्राकृतिक आपदा से बचाओ
बाढ़ भूकम्प से रक्षा कराओ
रोग शोक सब दूर करो माता
स्वस्थ रखो सबको विधाता
धन धान्य समृद्धि प्रदान करो
व्यापार उद्योग में उन्नति करो
विद्या बुद्धि बल प्रदान करो
शत्रु विजय में सहायता करो
विवाह योग बनाओ माता
संतान सुख दो हे विधाता
कुंवारी कन्या जो पूजे तुमको
मनचाहा वर मिले उसको
विंध्येश्वरी कृपा जिस पर होई
ताकी विपदा दूर सब होई
पूर्वांचल की तुम हो माता
उत्तर प्रदेश की हो विधाता
गंगा यमुना का संगम प्यारा
विंध्य क्षेत्र है सबसे न्यारा
चालीसा पाठ जो नित करही
विंध्येश्वरी कृपा सदा वरही
शक्ति प्रदान करो माँ तुम
भक्ति प्रदान करो माँ तुम
जय विंध्येश्वरी जय जय माता
जय विंध्याचल वासिनी दाता
॥ दोहा ॥
विंध्येश्वरी चालीसा पढ़े जो श्रद्धा भाव लगाय
सकल मनोरथ पूर्ण हों विंध्येश्वरी सहाय
ॐ