Chalisa/Shakambhari Chalisa
Durga

Shakambhari Chalisa

शाकम्भरी चालीसा

Shakambhari Chalisa is dedicated to Goddess Shakambhari, a form of Goddess Durga who nourishes the world with fruits and vegetables. She appeared during a great famine to feed the starving world. Her famous temples are in Saharanpur (UP) and Sambhar (Rajasthan).

॥ दोहा ॥ शाकम्भरी माता को प्रणाम करूँ बारम्बार अन्न धान्य की दाता तुम करो जगत उद्धार नीले वर्ण शाकम्भरी माँ शाक फल दायिनी भूखे जनन को अन्न दो तुम विपदा हारिणी ॥ चौपाई ॥ जय शाकम्भरी जय जगदम्बा अन्नपूर्णा परम अरम्बा दुर्गा का ही रूप तुम्हारा जग पालन हित अवतार तुम्हारा जब जब पृथ्वी पर अकाल आया तुमने शाक फलों से जग को खिलाया शत नेत्रों से जग को देखा दुख दरिद्र सबका दूर करेखा शतक्षी नाम तुम्हारा प्यारा सौ आँखों से जग को निहारा नील वर्ण अति शोभा तुम्हारी शाक फल हाथ में धारी सहारनपुर में मंदिर शोभित शाकम्भरी माँ का दरबार विभूषित सांभर में भी धाम तुम्हारा राजस्थान का गौरव न्यारा बनास नदी तट पर विराजो भक्तन पर कृपा बरसाओ नवरात्रि में विशेष पूजो शाकम्भरी के समान नहीं दूजो चैत्र और शारद नवरात्र पूजन करो शुभ मुहूर्त और पात्र अष्टमी को विशेष पूजन शाकम्भरी माँ का शुभ अर्चन फल शाक भोग लगाओ माँ शाकम्भरी को मनाओ अन्न दान करो भक्तों शाकम्भरी प्रसन्न होती भक्तों भूखे को भोजन दो सदा गरीबों की सेवा करो सदा अन्न धान्य का भण्डार भरो खेतों में फसल लहलहाओ करो वर्षा समय पर करवाओ माँ सूखा अकाल से बचाओ माँ किसानों की रक्षा करो माता फसल सुरक्षित करो विधाता प्राकृतिक आपदा से बचाओ बाढ़ सूखा ओला से बचाओ शाकम्भरी कृपा जहाँ होई अन्न धान्य की कमी ना होई रोग शोक सब दूर करो माँ स्वस्थ रखो सबको माँ धन धान्य सम्पत्ति प्रदान करो गरीबी दरिद्रता दूर करो शाकम्भरी माँ की जय बोलो अन्नपूर्णा का गुण गाओ बोलो चालीसा पढ़े जो भाव से शाकम्भरी कृपा करें सदा से जय शाकम्भरी जय जय माता तुम हो जग की अन्नदाता ॥ दोहा ॥ शाकम्भरी चालीसा पढ़े जो श्रद्धा भाव लगाय अन्न धान्य सब प्राप्त हो शाकम्भरी माँ सहाय