
Sai Chalisa
साई चालीसा
Sai Chalisa is a devotional hymn of 40 verses dedicated to Shirdi Sai Baba, the revered saint who preached love, forgiveness, and devotion to God.
ॐ
॥ दोहा ॥
पहले साईं के चरणों में अपना शीश नवाऊँ
कैसे हुई शिरडी में साईं बाबा की आई बताऊँ
॥ चौपाई ॥
शिरडी में आये साई भगवान
चरण पड़े सबके कल्यान
नीम तले बैठे फ़कीर
अनजाने में थे वो पीर
धूनी जलाये रखते आग
जलती रहे दिन रात विराग
काम क्रोध सब दूर भगाये
सब को सत्य का मार्ग बताये
सबका मालिक एक कहावें
हिन्दू मुस्लिम सबको भावें
अल्लाह मालिक कहते सदा
सब पर कृपा बरसते सदा
भक्तों के दुख दूर करावें
दया दृष्टि से सब पर छावें
लेंडी बाग में जाते नित्य
भक्तन से मिलते अति प्रीत
द्वारकामाई मस्जिद बासा
सबको दर्शन की थी आशा
चावड़ी में भी रात बिताते
भक्तन संग सत्संग सुनाते
नानावल्ली से आये पहले
किसी ने जाना ना उन पहले
मद्रासी भक्त हो या बम्बई वाला
सबको दिया आशीष निराला
बिमार तन को हाथ लगाते
सब रोग दोष दूर हो जाते
भूत प्रेत बाधा हरते सदा
दे दीन दुखियों को सुखदा
अन्न वस्त्र सबको बाँटे
किसी भूखे को कभी न छोड़ते
उदी प्रसाद बाँटते सबको
रोग शोक दूर करते तबको
श्रद्धा सबुरी दो शब्द बताये
इनमें सारा ज्ञान समाये
मुर्शद फ़कीर थे बाबा साईं
सब जग तारन को आये भाई
गुरु नानक बुद्ध कबीर समाना
साईं बाबा का अमर फ़साना
समाधि ली अठारह सौ अठारह में
विजयादशमी को गये परमधाम
पर भक्तन को वचन दिये थे
मैं समाधि से बोलूँगा जी
जो भक्त मेरी शरण में आवे
दुख दारिद्र कबहुँ नहिं पावे
मैं सदा जीवित हूँ कहना
भक्तों का विश्वास है रहना
बृहस्पतिवार को व्रत जो करते
साईं बाबा सब कष्ट हरते
सच्चे मन से जो शरण पुकारे
साईं बाबा सब कष्ट निवारे
संकट में जो नाम पुकारे
साईं दौड़ के आन उबारे
अनन्य भक्ति से जो जन गावें
साईं चालीसा सुख पावें
जय जय साईं अपार दयाला
करो कृपा मुझ पर महाराजा
दुख दारिद्र पाप सब हरियें
भक्त जनन को सुख से भरियें
चालीसा साईं का पढ़ें जो कोई
उसकी बिगड़ी बने सहोई
॥ दोहा ॥
साईं चालीसा करत नित भक्तन मंगल होय
जो इच्छा मन में धरें पूरी करें सब कोय
ॐ