Chalisa/Ravidas Chalisa
Vishnu

Ravidas Chalisa

रविदास चालीसा

Ravidas Chalisa is dedicated to Sant Ravidas, the great 15th-century saint-poet of the Bhakti movement. A contemporary of Kabir and a disciple of Ramananda, he preached equality, devotion to God, and the removal of caste discrimination. He is revered across North India.

॥ दोहा ॥ गुरु रविदास जी को प्रणाम करूँ शीश नवाय भक्ति ज्ञान के दाता हो मेरे गुरु महाराय मन क्रम वचन ध्यान धरूँ गुरु रविदास के पाय कृपा करो गुरुदेव जी मेरा कष्ट मिटाय ॥ चौपाई ॥ जय गुरु रविदास दया के सागर जय संत शिरोमणि ज्ञान उजागर काशी नगरी में प्रकट भये तुम माता कलसा पिता संतोख दास हुए तुम चमड़ा कर्म किया संसारा पर मन में हरि का ध्यान अपारा रामानंद गुरु की शरण गये तुम भक्ति मार्ग का ज्ञान लिये तुम निर्गुण भक्ति तुमने गाई जग में प्रेम की ज्योत जलाई ऊँच नीच का भेद मिटाया समता का संदेश सुनाया बेगमपुरा शहर बसाया जहाँ दुख नहीं कोई पाया मन चंगा तो कठौती में गंगा यही वचन तुमने सिखलाया मीरा बाई को गुरु दीक्षा दी भक्ति मार्ग की शिक्षा दी प्रभु जी तुम चंदन हम पानी तुम्हरी महिमा जग में बानी तुम्हरे पद गंगा जल पावन करो हमारा जीवन पावन अभिमान त्याग कर भक्ति करो प्रभु के चरणों में शीश धरो कहि रविदास सब एक समाना प्रभु की भक्ति में नहीं कोई बेगाना तोही मोही मोही तोही अंतर कैसा कनक कटिक जल तरंग जैसा ऐसी लाल तुझ बिन कउनु करै गरीब निवाजु गुसईआ मेरा जाति जाति में जाति है जो केतन के पात रविदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे न कोय जो सुख में सुमिरन करे दुख काहे को होय करम बंधन में बंधे सब जीवा गुरु रविदास ने पथ दिखलाया मन ही पूजा मन ही धूप मन ही सेऊँ सहज सरूप सब कुछ मन का खेल है सब कुछ मन में होय मन ही स्वर्ग मन ही नरक मन ही जीवन सोय भक्ति मुक्ति का मार्ग बताया जग को सत्य का ज्ञान कराया गुरु रविदास जी की जय बोलो प्रेम भक्ति का बीज तुम बोलो निर्भय निर्मल ज्ञान दो गुरुदेव करो कृपा मिटे सब संदेह चालीसा पढ़े जो भाव से गावे गुरु रविदास कृपा सुख पावे संत रविदास की अमृत वाणी जग में सबसे न्यारी बानी ॥ दोहा ॥ रविदास चालीसा पढ़े जो नर नारी नित्य गुरु रविदास प्रसन्न हों दें ज्ञान भक्ति नित्य