Chalisa/Mahavir Chalisa
Vishnu

Mahavir Chalisa

महावीर चालीसा

Mahavir Chalisa is dedicated to Lord Mahavira, the 24th Tirthankara of Jainism. This chalisa is popular among those who follow Jain traditions alongside Hindu practices. It praises Mahavira's supreme renunciation, non-violence, and path to liberation.

॥ दोहा ॥ वर्धमान महावीर को प्रणाम करूँ बारम्बार अहिंसा धर्म के प्रवर्तक करो जगत उद्धार जिन वाणी नित सुनत जो मन लाय चित्त धार ज्ञान विवेक प्रकाश हो महावीर नमस्कार ॥ चौपाई ॥ जय महावीर जिनेश्वर स्वामी अंतर्यामी सर्वज्ञ गुणधामी क्षत्रिय कुल में जन्म लियो तुम कुंडलपुर नगरी में आयो तुम राजा सिद्धार्थ पिता तुम्हारे त्रिशला माता जग से न्यारे बचपन से वैराग्य धारा संसार मोह से किया किनारा तीस वर्ष गृहस्थ में रहकर दीक्षा ली सब त्याग कर बारह वर्ष कठोर तप कीन्हा केवल ज्ञान प्राप्त तुम लीन्हा जृम्भिक ग्राम में ज्ञान पायो ऋजुबालुका नदी तट पर ध्यान लगायो अहिंसा परमो धर्मः तुम सिखलाये जीव दया का पथ तुम बतलाये सत्य अस्तेय अपरिग्रह ब्रह्मचर्य पंच महाव्रत दिये अनर्घ्य अनेकांतवाद तुम सिखलाये स्याद्वाद का ज्ञान बतलाये त्रिरत्न मार्ग तुमने दिखलाया सम्यक दर्शन ज्ञान चरित्र बतलाया गणधर गौतम प्रमुख शिष्य भये चतुर्विध संघ की स्थापना कीये इन्द्रियों पर विजय तुम पायो जितेन्द्रिय तुम कहलायो काम क्रोध लोभ मोह से पार महावीर तुम जगत उद्धार कर्मों का बंधन तोड़ दिया तुम मोक्ष मार्ग का ज्ञान दिया तुम पावापुरी में निर्वाण पायो दीपावली को प्रकाश फैलायो चौबीसवें तीर्थंकर तुम हो जैन धर्म के प्रकाश स्तम्भ तुम हो क्षमा शांति संयम तप दानी सबसे महान तुम्हारी बानी जीवो और जीने दो यह सिखलाये अहिंसक जीवन का पथ दिखलाये मन वचन काय से हिंसा त्यागो सत्य मार्ग पर सदा विरागो महावीर का नाम सुहाना भव सागर से पार उतराना चालीसा पढ़े जो नित्य सुनावे परम ज्ञान का फल वो पावे सर्व मंगल का करो विधान जय महावीर भगवान ॥ दोहा ॥ महावीर चालीसा पढ़े जो श्रद्धा भाव लगाय सर्व सिद्धि सुख शांति हो महावीर सहाय