
Brahma Chalisa
ब्रह्मा चालीसा
The Brahma Chalisa is a devotional hymn of 40 verses dedicated to Lord Brahma, the creator god of the Hindu trinity. Reciting this chalisa is believed to enhance knowledge, creativity, and bring success in educational and creative pursuits.
ॐ
॥ दोहा ॥
जय ब्रह्मा देव प्रणाम सृष्टि रचयिता भगवान
चतुर्मुख चतुर्वेद प्रभु कृपा करो वरदान
कमलासन विधि विधाता प्रभु प्रणमूँ बारंबार
ब्रह्मा चालीसा पढ़ूँ करो कृपा अपार
॥ चौपाई ॥
जय ब्रह्मा देव जगत पिता हो
सृष्टि रचना के तुम विधाता हो
विष्णु नाभि कमल से प्रकटे
चतुर्मुख रूप जगत में विरजे
चार मुख चार वेद बखाने
ऋग्वेद यजुर्वेद सम गाने
सामवेद अथर्ववेद सुनाये
चारों वेद तुम्हीं ने बनाये
सरस्वती तव संगिनी प्यारी
विद्या कला की अधिकारी
कमलासन पर सदा विराजो
ब्रह्मलोक में नित्य बिराजो
हंस वाहन तुम्हरा सुहावे
श्वेत वस्त्र शोभा अति पावे
कमंडल अक्षमाला कर शोभे
वेद पुस्तक दूजे कर शोभे
सृष्टि की रचना तुम ने कीन्ही
प्राणी मात्र को उत्पत्ति दीन्ही
मनु शतरूपा को रचा तुमने
प्रजापति सब बनाये तुमने
सप्त ऋषि तुम ही ने रचाये
नारद मुनि भी तुम्हें ध्यावे
दक्ष प्रजापति तव सुत प्यारे
मरीचि अत्रि पुलस्त्य दुलारे
पुलह क्रतु अंगिरा वसिष्ठ
भृगु नारद सब तुम्हरे इष्ट
कल्प कल्प में सृष्टि रचाओ
प्रलय काल में सब समेटाओ
ब्रह्मा हरि हर तीन एक हैं
सृष्टि पालन संहार विवेक हैं
पुष्कर में तुम्हरा है धाम
जग में एक ही मंदिर नाम
ब्रह्मा जी की पूजा करही
सृष्टि रहस्य ते सब समझ परही
चतुर्मुख से ज्ञान प्रकाशे
अज्ञान तिमिर सब दूर निकासे
विद्या बुद्धि के दाता प्रभु तुम
ज्ञान विज्ञान विधाता प्रभु तुम
शिक्षा दीक्षा में सफलता दो
परीक्षा में विजय का पथ दो
रचनात्मक शक्ति प्रदान करो
कला साहित्य में मान करो
लेखक कवि विद्वान बनाओ
ज्ञान का दीपक सदा जलाओ
जो कोई ब्रह्मा गुण गावे
ताके जीवन में ज्ञान सो पावे
सृष्टि कर्ता की जय जयकार
भक्तन को दो ज्ञान अपार
मोह माया से पार करो तुम
ब्रह्मज्ञान का दान करो तुम
आत्मज्ञान की प्राप्ति करावो
संसार सागर से पार लगावो
ब्रह्मा जी कृपा करो दयाला
भक्तन को करो सदा निहाला
चालीसा पाठ जो नित करही
ज्ञान विद्या से युक्त रहही
ब्रह्मा कृपा जिस पर होई
ताकी बुद्धि निर्मल होई
जय ब्रह्मा जय जय विधाता
जय जय सृष्टि के रचनहारा
कलम कागज तुम्हरी शक्ति
भक्तन को दो शुद्ध भक्ति
॥ दोहा ॥
ब्रह्मा चालीसा पढ़े जो नित प्रेम विश्वास
ज्ञान विद्या बल बुद्धि मिले पूरे मन की आस
ॐ