
Bhagavad Gita Chalisa
भगवद् गीता चालीसा
Bhagavad Gita Chalisa is dedicated to the sacred scripture Shrimad Bhagavad Gita, the divine song of Lord Krishna spoken on the battlefield of Kurukshetra to Arjuna. This chalisa summarizes the essence of all 18 chapters and glorifies the transformative wisdom of the Gita.
ॐ
॥ दोहा ॥
श्रीमद भगवद गीता को प्रणाम करूँ बारम्बार
कृष्ण वचन अमृत वाणी करो जगत उद्धार
गीता सार सुनो भक्तों कृष्ण अर्जुन संवाद
अठारह अध्याय का सार सुनो प्रभु का प्रसाद
॥ चौपाई ॥
जय श्रीमद भगवद गीता
कृष्ण वचन अमृत सुपुनीता
कुरुक्षेत्र में ज्ञान सुनाया
अर्जुन को कृष्ण ने समझाया
विषाद योग पहला अध्याय
अर्जुन का मोह दिखाय
सांख्य योग में ज्ञान बताया
आत्मा अजर अमर समझाया
न हन्यते हन्यमाने शरीरे
आत्मा अविनाशी सदा अधीरे
कर्म योग तीसरे में कहा
निष्काम कर्म ही श्रेष्ठ रहा
ज्ञान कर्म सन्यास योग सुनाया
ज्ञान अग्नि से कर्म जलाया
कर्म सन्यास योग में बोले
त्याग और योग दोनों खोले
ध्यान योग छठे में कहा
मन को वश में करना रहा
ज्ञान विज्ञान योग सुनाया
प्रकृति पुरुष का भेद बताया
अक्षर ब्रह्म योग में ज्ञान
ओंकार का किया बखान
राजविद्या राजगुह्य योग
परम रहस्य सुनाया भोग
विभूति योग में प्रभु ने कहा
मैं ही सब में व्याप्त रहा
विश्वरूप दर्शन योग सुनाया
अर्जुन को विराट रूप दिखाया
भक्ति योग बारहवें में गाया
प्रेम भक्ति का मार्ग बताया
क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग सुनाया
शरीर आत्मा का भेद बताया
गुणत्रय विभाग योग में कहा
सत्व रजस तमस गुण का रहा
पुरुषोत्तम योग पन्द्रहवें में
क्षर अक्षर से परे बताया उसमें
दैवासुर सम्पद विभाग योग
दैवी आसुरी स्वभाव का भोग
श्रद्धात्रय विभाग योग सुनाया
तीन प्रकार की श्रद्धा बताया
मोक्ष सन्यास योग अठारहवें
सार सुनाया कृष्ण ने अंत में
मामेकं शरणं व्रज कृष्ण बोले
सब धर्म त्याग कर मेरी शरण में आ खोले
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति
तदात्मानं सृजाम्यहम
सम्भवामि युगे युगे कृष्ण ने कहा
धर्म स्थापना हित अवतार लिया
गीता पाठ जो नित्य करे
सकल पाप ताप दुख दूर हरे
गीता ज्ञान अमृत की धारा
कृष्ण वचन जग का आधारा
चालीसा गीता का जो गावे
परम ज्ञान मोक्ष फल पावे
जय गीता जय कृष्ण मुरारी
गीता ज्ञान सबसे सुखकारी
॥ दोहा ॥
गीता चालीसा पढ़े जो कोई नर नार
कृष्ण कृपा से ज्ञान हो भव सागर से पार
ॐ