Chalisa/Annapurna Chalisa
Durga

Annapurna Chalisa

अन्नपूर्णा चालीसा

The Annapurna Chalisa is a devotional hymn of 40 verses dedicated to Goddess Annapurna, the deity of food and nourishment. She is a form of Goddess Parvati. Reciting this chalisa is believed to ensure that the household never faces shortage of food and brings abundance and prosperity.

॥ दोहा ॥ जय अन्नपूर्णा माता देवी अन्नदायिनी माय भूख प्यास हर लो प्रभु भक्तन को तृप्त कराय अन्नपूर्णा शिवप्रिया माता प्रणमूँ बारम्बार चालीसा तव गाऊँ माता करो कृपा अपार ॥ चौपाई ॥ जय अन्नपूर्णा देवी माता अन्न धान्य की तुम विधाता काशी पुरी में तुम विराजो शिव को भिक्षा नित्य तुम साजो स्वर्ण पात्र में अन्न सजाया शिव शंकर को भोग लगाया अन्नपूर्णाष्टक जो पढ़े सुनावे ताके घर अन्न की कमी न आवे पार्वती का रूप तुम्हारा अन्नदायिनी नाम प्यारा जग जननी तुम माँ अन्नपूर्णा तुमसे जग का पेट है भरना क्षुधा तृषा तुम दूर करो भूखे जन का पेट भरो अन्न ब्रह्म है तुमने बताया अन्न दान का मार्ग दिखाया जो अन्न दान नित्य करही अन्नपूर्णा कृपा सो वरही भोजन से पहले प्रार्थना करें अन्नपूर्णा को नमन करें रसोई में तुम सदा विराजो भोजन को स्वादिष्ट बनाजो गृहिणी को शक्ति प्रदान करो पाक कला में निपुण करो अन्न की बरबादी न होवे अन्नपूर्णा कृपा से सबको मिलोवे गरीब भूखे को अन्न खिलाओ अन्नदान का पुण्य कमाओ अक्षय तृतीया अन्नदान पुण्य लाभ सबसे महान एकादशी पर अन्न त्यागें अन्नपूर्णा ध्यान में लागें माता तेरी महिमा न्यारी अन्न बिना जग है बेचारी फसल अच्छी हो खेत में अन्नपूर्णा कृपा करो हेत में किसान की रक्षा करो माता फसल की उन्नति के विधाता बाढ़ सूखा अकाल निवारो अन्न संकट से जग को उबारो अन्नपूर्णा माता कृपा करो भूख गरीबी दूर तुम करो सबको भरपेट भोजन मिले कोई भूखा न संसार में रहे स्वस्थ शरीर अन्न से बने पोषण मिले तो जीवन सँवरे अन्नपूर्णा स्तोत्र जो गावे अन्न धन सम्पत्ति सो पावे जो अन्नपूर्णा ध्यान लगावे ताके घर सदा अन्न भरपूर आवे कभी न कमी किसी चीज की होवे अन्नपूर्णा कृपा से सब कुछ मिलोवे धन धान्य से घर भरो माता सुख समृद्धि की हो विधाता चालीसा पाठ जो नित करही अन्न धन की कमी न रहही जय अन्नपूर्णा जय जय माता जगत जननी अन्नदाता ॥ दोहा ॥ अन्नपूर्णा चालीसा पढ़े जो श्रद्धा मन लाय अन्न धन सुख सम्पदा माता पूर्ण कराय