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आरती कैसे करें — Aarti Karne Ka Sahi Tarika, Vidhi & Rules

Hindu Aarti EditorialApr 10, 20265 min read
आरती कैसे करें — Aarti Karne Ka Sahi Tarika, Vidhi & Rules

आरती (Aarti) हिंदू पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह देवता के समक्ष दीपक या कपूर की लौ घुमाकर की जाने वाली एक पवित्र विधि है। लेकिन बहुत से लोग सही तरीके से आरती करना नहीं जानते। इस गाइड में हम aarti kaise kare — आरती करने का सही तरीका, नियम और विधि विस्तार से बताएंगे।

आरती के लिए आवश्यक सामग्री (Items Needed for Aarti)

| सामग्री (Item) | उपयोग (Purpose) | |----------------|-----------------| | आरती की थाली (Aarti Thali) | पीतल या तांबे की थाली सर्वोत्तम | | दीया / दीपक (Diya) | घी या तेल का दीपक — घी का दीपक अधिक शुभ | | कपूर (Camphor) | शुद्ध कपूर जलाना सबसे उत्तम माना जाता है | | बत्ती / रुई (Cotton Wick) | दीये के लिए रुई की बत्ती | | फूल (Flowers) | ताज़े फूल — गेंदा, गुलाब, कमल | | अगरबत्ती / धूप (Incense) | सुगंधित वातावरण के लिए | | घंटी (Bell) | आरती के दौरान बजाने के लिए |

आरती करने की सही विधि (Step-by-Step Aarti Process)

Step 1 — तैयारी (Preparation): हाथ-मुँह धोएं, स्वच्छ कपड़े पहनें। आरती की थाली में दीपक जलाएं और कपूर, फूल, अक्षत रखें।

Step 2 — घंटी बजाएं (Ring the Bell): बाएं हाथ से घंटी बजाएं। घंटी की ध्वनि नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है और वातावरण को पवित्र बनाती है।

Step 3 — दीपक घुमाएं (Rotate the Flame): दाएं हाथ से आरती की थाली पकड़ें और देवता के सामने clockwise (दक्षिणावर्त / घड़ी की दिशा में) घुमाएं।

महत्वपूर्ण नियम: दीपक हमेशा ऊपर से नीचे नहीं, बल्कि गोलाकार (circular motion) में घुमाएं — पहले चरणों से शुरू करें, फिर नाभि, फिर मुख, और अंत में पूर्ण आकृति की आरती करें।

Step 4 — आरती के चक्र (Number of Rotations):

  • देवता के चरणों में: 4 बार
  • नाभि (मध्य) पर: 2 बार
  • मुख (चेहरे) पर: 1 बार
  • पूर्ण आकृति: 7 बार (संपूर्ण शरीर के चारों ओर)

Step 5 — आरती गाएं (Sing the Aarti): प्रत्येक देवता की अपनी विशेष आरती होती है:

  • गणेश जी: "जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा..."
  • शिव जी: "ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा..."
  • लक्ष्मी जी: "ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता..."
  • हनुमान जी: "आरती कीजै हनुमान लला की..."
  • विष्णु जी: "ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे..."

Step 6 — आरती लें (Receive the Blessing): आरती के बाद दोनों हाथों को लौ के ऊपर रखकर गर्माहट लें और हाथों को माथे पर लगाएं। यह दिव्य ऊर्जा को ग्रहण करने का प्रतीक है।

आरती में होने वाली सामान्य गलतियां (Common Mistakes)

  • गलत दिशा में घुमाना: आरती हमेशा clockwise (दक्षिणावर्त) घुमाएं, कभी anti-clockwise नहीं
  • दीपक बुझ जाना: दीपक में पर्याप्त घी/तेल रखें, बुझी हुई आरती अशुभ मानी जाती है
  • आरती जल्दी-जल्दी करना: आरती धीरे-धीरे, भक्ति भाव से करें — जल्दबाजी न करें
  • फूंक मारकर बुझाना: दीपक को कभी फूंक मारकर न बुझाएं — हाथ से हवा करके या ढक्कन से बुझाएं
  • अशुद्ध थाली: थाली साफ और चमकदार होनी चाहिए

कब करें आरती? (Best Time for Aarti)

  • सुबह: सूर्योदय के समय (प्रातः आरती)
  • दोपहर: मध्याह्न 12 बजे (राजभोग आरती)
  • शाम: सूर्यास्त के समय (संध्या आरती) — यह सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है
  • रात: सोने से पहले (शयन आरती)

आरती सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि परमात्मा से सीधा जुड़ने का माध्यम है। सही विधि से की गई आरती घर में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।