Bhajans/Mangal Bhavan Amangal Hari
Ram

Mangal Bhavan Amangal Hari

मंगल भवन अमंगल हारी

Ram Bhajan

A famous chopaai from Goswami Tulsidas's Ramcharitmanas, often sung as an opening prayer. It describes Lord Ram as the remover of all inauspiciousness and the abode of auspiciousness.

मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी। मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी॥ राम सिया राम सिया राम जय जय राम, राम सिया राम सिया राम जय जय राम॥ हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहिं सुनहिं बहुविधि सब संता। राम सिया राम सिया राम जय जय राम, राम सिया राम सिया राम जय जय राम॥ मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी। राम सकल गुणधाम नाम ते, पुरवहु मम मनोरथ काम ते। निज दासन हित सुख सम्पदा, अखिल लोक जग करत सदा॥ मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी। राम सिया राम सिया राम जय जय राम, राम सिया राम सिया राम जय जय राम॥